सुनता हूँ रमजान माह का

सुनता हूँ रमजान माह काउदय हुआ अब पीला चाँद,मदिरालय की गलियों में अबफिर न सकूँगा कर फ़रियाद!मैं जी भर शाबान महीनेपीलूँगा मदिरा इतनी,पड़ा रहूँ अलमस्त ईद तकरहे न रोज़ों की…

0 Comments

बुझता हो जीवन प्रदीप जब

बुझता हो जीवन प्रदीप जबउसको मदिरा से भरना,मृत्यु स्पर्श से मुरझाएपलकों को मधु से तर करना!द्राक्षा दल का अंगराग मलताप विकल तन का हरना,स्वप्निल अंगूरी छाया मेंक़ब्र बना, मुझको धरना!

0 Comments

सौ सौ धर्मान्धों से बढ़कर

सौ सौ धर्मान्धों से बढ़कर पूत एक मदिरा का जाम, चीन देश से भी अमूल्य रे मधु का फैला फेन ललाम! निखिल सृष्टि की प्रिया सुरा यह, जीवों के प्राणों…

0 Comments

 ज्ञानोज्वल जिनका अंतस्तल

ज्ञानोज्वल जिनका अंतस्तल उनको क्या सुख-दुःख, फलाफल? मदिरालय जिसका उर तन्मय, उसको क्या फिर स्वर्ग-नरक-भय? वह मानस जिसमें मदिरा रस उसे वसन क्या? टाट कि अतलस! अवश पलक पाएँ न…

0 Comments

हंस से बोली व्याकुल मीन

हंस से बोली व्याकुल मीन करुणतर कातर स्वर में क्षीण, ‘बंधु, क्या सुन्दर हो’ प्रतिवार लौट आए जो बहती धार!’ हंस बोला, ‘हमको कल व्याध भून डालेगा, तब क्या साध?…

0 Comments

मदिराधर रस पान कर रहस

मदिराधर रस पान कर रहस त्याग दिया जिसने जग हँस हँस, उसको क्या फिर मसजिद मंदिर सुरा भक्त वह मुक्त अनागस! हृदय पात्र में प्रणय सुरा भर जिसने सुर नर…

0 Comments

 सुरालय हो मेरा संसार

सुरालय हो मेरा संसार, सुरा-सुरभित उर के उद्गार! सुरा ही प्रिय सहचरि सुकुमार, सुरा, लज्जारुण मुख साकार! उमर को नहीं स्वर्ग की चाह, सुरा में भरा स्वर्ग का सार! सुरालय…

0 Comments

 राह चलते चुभता जो शूल

राह चलते चुभता जो शूल वही उसके स्वभाव अनुकूल! कामिनी की वह कुंचिक अलक कभी था कुटिल भृकुटि, चल पलक! खड़े जो सुंदर सौध विशाल सुनो उनकी ईंटों का हाल,…

0 Comments

मदिराधर कर पान सखे

मदिराधर कर पान, सखे, तू न धर न जुमे का ध्यान, लाज स्मित अधरामृत कर पान! सभी एक से तिथि, मिति, वासर, जुमा, पीर, इतवार, शनीचर! नीति-नियम निःसार! धर्म का…

0 Comments

वृथा यह कल की चिन्ता, प्राण

वृथा यह कल की चिन्ता, प्राण आज जी खोल करें मधुपान! नीलिमा का नीलम का जाम भरा ज्योत्स्ना से फेन ललाम! इंदु की यह सलज्ज मुसकान रहेगी जग में चिर…

0 Comments