Umashankar Joshi उमाशंकर जोशी |
गुजराती कविता हिन्दी में : उमाशंकर जोशी
Gujrati Poetry in Hindi : Umashankar Joshi

बगुलों के पंख

नभ में पांती बांधे बगुलों के पंख,चुराए लिए जातीं वे मेरी आंखें। कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,तैरती सांझ की सतेज श्वेत काया। हौले - हौले जाती मुझे बांध निज…

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छोटा मेरा खेत

छोटा मोरा खेत चौकोनाकागज़ का एक पन्ना,कोई अंधड़ कहीं से आयाक्षण का बीज बहाँ बोया गया । कल्पना के रसायनों को पीबीज गल गया नि:शेष;शब्द के अंकुर फूटे,पल्लव-पुष्पों से नमित…

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आत्मसंतोष

नहीं, नहीं, अब नहीं हैं रोनी हृदय की व्यथाएँ जो जगत् व्यथा देता है, उसी जगत् को अबरचकर गाथाएँ व्यथा की वापस नहीं देनी हैं।दुःख से जो हमें पीड़ित करता…

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अरमान

अगण्य क्षणों में से एकाध को पकड़समय की अनंत कुहुकिकाएँ उनमें फूंक करस्फुरित कर जग में, कहते हैं :'हमारे ये अमर सुशोभित काव्य !'अरे, सचमुच यही क्या कवि-ज़िन्दगी ? जीवन…

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निशीथ

1हे निशीथ, रुद्ररम्य नर्तक !कंठ में शोभित स्वर्गंगा का हारबजता है कर में झंझा-डमरूघूमता हुआ धूमकेतु है तेरे शीश का पिच्छ-मुकुटतेजस्-मेघों के हैं तेरे दुकूल फहराते दूर,सृष्टिफलक पर, हे भव्य…

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