मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने

हाल दिल का तुझसे कह दिया तेरा काम जाने,
मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने।।

रंग दुनिया के मैं ना समझ पता हूँ,
फस के माया में तेरी उलझ जाता हूँ,
फास के माया में तेरी उलझ जाता हू।।

कैसे रखता है तू सब पे लगाम जाने,
मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने।।

तुझको मंजूर जो होता वही जग में होता वही,
राज गहरा हो कितना वो छुपता नहीं,
शिव तेरे किसी का न कोई अंजाम जाने,
मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने।।

छोड़ा जब तो प्रभु तेरा दर मिल गया,
इस दस को चरणों में घर मिल गया,
कैसा रक्खेगा तू भक्तो का सम्मान जाने,
मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने।।

हाल दिल का तुझसे कह दिया तेरा काम जाने,
मेरी बिगड़ी बनेगी कैसे तू ही राम जाने।।

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