बगुलों के पंख

नभ में पांती बांधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरी आंखें।

कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती सांझ की सतेज श्वेत काया।

हौले – हौले जाती मुझे बांध निज माया से।
उसे कोई तनिक रोक रक्खो।

वह तो चुराए लिए जाती मेरी आंखें
नभ में पांती – बंधी बगुलों की पांखें ।

गुजराती कविता हिन्दी में : उमाशंकर जोशी
Gujrati Poetry in Hindi : Umashankar Joshi

Other Latest posts

Leave a Reply