प्रातःकाल

अहा! स्वर्ग ही हमारे लोक में
फिसलकर गिर पड़ा है,
आइए! भर लेने इसे अपने हृदय का
सुवर्ण पात्र लाइए।

जल्दी आइए, जल्दी आइए
पिघल जाने से पहले! आइए
देर किये बिना दौड़े आइए
स्वर्गगंगा ही यहाँ बह रही
धरती के सब बच्चों को,
सुनो, पुकार रहा है, स्वर्ग यहाँ।

कन्नड़ कविता हिन्दी में : कुपल्ली वेंकटप्पागौड़ा पुटप्पा (कुवेम्पु)
Kannada Poetry in Hindi : Kuppali Venkatappa Puttappa (Kuvempu)

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