क्यों ?

पानी क्यों बहता है?
बहता है!
सागर से मिलने के लिए है न?
मिलता है!
लेकिन क्या?
सागर से मिलने के लिए
बहता नहीं है पानी;
बहते बहते, सागर से मिल जाता है
और कुछ नहीं!

आग क्यों जलती है?
जलती है!
खाना पकने के लिए, है न?
पकता है!
लेकिन क्या?
खाना पकने के लिए
जलती नहीं है आग;
जलने से पक जाता है मात्र,
और कुछ नहीं!

सूरज क्यों चमकता है? .
चमकता है!
धरती को प्रकाशित करने के लिए है न?
हाँ वह!
लेकिन क्या?
धरती को प्रकाशित करने के लिए
चमकता नहीं है सूरज;
चमकने से धरती हो जाती है प्रकाशित,
और कुछ नहीं!

सृष्टि हुई आखिर क्योंकर?
हुई है !
कर्म मिटाने के लिए, है न?
मिटता है!
लेकिन क्या?
कर्म मिटाने के लिए
हुई नहीं है सृष्टि;
होने पर सृष्टि, मिट जाता है कर्म,
और कुछ नहीं!

कन्नड़ कविता हिन्दी में : कुपल्ली वेंकटप्पागौड़ा पुटप्पा (कुवेम्पु)
Kannada Poetry in Hindi : Kuppali Venkatappa Puttappa (Kuvempu)

Leave a Reply